आज मैं आप से ऐसे विषय पर चर्चा करने जा रहा हूँ । जो बहुत ही सामान्य है । जीवन में ऐसे बहुत से लोगों से से भेंट हो जाती है, जिनका मानसिक संतुलन बिगड़ जाता है। ऐसा होने के बहुत से कारण हो सकते हैं।
जैसे -
1 - परिवार के भार के दबाव में आके किसी व्यक्ति का
अपना मानसिक संतुलन बिगड़ जाता है।
2 - कुछ लोग ऐसे भी होते हैं,
जिनका ये संतुलन जन्म से बिगड़ जाता है।
3 - कुछ लोग किसी छोटे से छोटे विषय पर समाज या परिवार वालों या मित्रों के कहे जाने पर अपना मानसिक संतुलन बिगाड़ बैठते हैं।
मैंने जिन लोगों का उदाहरण दिया है, ये लोग तो अपनी इस दशा के उत्तरदायी तो है ही । लेकिन इनको इस दशा तक लाने वाले इनसे ज्यादा उत्तरदायी हैं। समाज में ऐसा भी देखा गया है, कि ऐसे लोगों को ज्यादा महत्त्व नहीं दिया जाता। कुछ लोग तो इनको महत्त्व देना तो दूर ऐसे लोगों के पास जाने से डरतें है। लेकिन ये बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। जिस कारण ऐसे लोग इस दुनिया में स्वयं को अकेला अनुभव करतें है, और कभी- कभी ये लोग किसी अपराध को भी अंजाम दे सकते हैं । ऐसा न हो इसलिए हमें इनके उपचार के और इनके मानसिक शक्ति के लिए नए अवसर खोजने चाहिए।
मानसिक बीमारी क्या है ?
मनुष्य कभी सुखी होता है, तो कभी दुखी हो जाता हैं । कभी मनुष्य को किसी भी प्रकार कि चिंता या भय भी हो सकता है । कभी किसी काम के होने की आशा भी जगती है, तो कभी मन निराश हो जाता है । लेकिन ये सभी लक्षण दीर्घ समय तक इसी प्रकार उस मनुष्य को होते रहे, तो मनुष्य मानसिक बीमारी का शिकार बन जाता है । तभी मनुष्य का एकाग्र होना आवश्यक है ।
यदि हम मानसिक बीमारी से ग्रसित व्यक्ति को उचित समय में उपचार प्रदान कर दे, तो हम उसे ठीक भी कर सकते हैं । हमें मनोचिकित्सकों की सहायता के बिना ऐसे रोगियों को ठीक करने के कोई घरेलू उपाय नहीं खोजने चाहिए। यदि ऐसे लोगों का सही समय में इलाज नहीं किया गया, तो ऐसे लोगों को समझ पागल घोषित कर देता है।
आज भी बहुत से क्षेत्रों में ऐसे लोगों को देखा जाता है, जो शिक्षित होकर भी अपने परिवार और समाज के डर से इस बिमारी को छुपातें हैं। ये लोग वो होतें हैं, जो कुछ भी करने से पहले समाज और परिवार के लोगों को देखना आयश्यक समझते हैं। ये लोग इस बीमारी से लड़ने की लिए विभिन्न प्रकार के घरेलू उपाय और अन्धविश्वाशों में फस जाते हैं। मैं ऐसे लोगों से विनम्र निवेदन करता हूँ की कृपया यदि आप अपने परिवार की ख़ुशी देखना चाहते हैं, तो समाज को मत देखिये ।
लोगों के मन में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता लाना आवस्यक है । लोगों को ये जानना जरूरी है की हर मानसिक रोग से ग्रसित व्यक्ति पागल नहीं हो सकता। इसी जागरूकता को फ़ैलाने के लिए भारत सरकार ने सन
1987 में मानसिक स्वास्थय अधिनियम लागू किया। जिसके अंतर्गत मानसिक रोगियों के अधिकार, इलाज की सुविधा और कानूनी सुरक्षा जान लेना हर व्यक्ति को आवश्यक है।
मानसिक रोगी होने के लक्षण
यहाँ मैं कुछ मानसिक रोगी होने के लक्षण लिख रहा हूँ,
जो निम्न हैं
-
1 - यदि आपको अपने किसी भी काम को करने में पहले से जागरूकता कम होती जा रही है, तो आप धीरे - धीरे इस बीमारी से ग्रसित हो सकतें हैं।
2 - यदि आपके समाज और अपने परिवार के लोगों के साथ संपर्क पहले जैसे नहीं हैं, तो निश्चित ही आप अकेले रहना पसंद करतें हैं। ये एक मानसिक अस्वस्थता के लक्षण हैं।
3 - यदि आप आजकल खुश नहीं हैं और आप खुश नहीं होना चाहते ।
4 - यदि आप दूसरों से नफरत करने लगे हैं। आपको किसी व्यक्ति विशेष की बातें और हरकतें ( चलने, खाने, हसने, बोलने का ढंग
) अच्छी नहीं लग रही हैं ।
5 - यदि आप स्वंय से भी नफरत करते हैं तो ।
6 - यदि आप किसी भी वस्तु को बिना सोचे समझे किसी के ऊपर मामूली झगडे में फेक देते हैं, तो आपकी मानसिक स्थिति सही नहीं है।
इन से भी ज्यादा लक्षण हो सकते हैं। यदि इन लक्षणों पर व्यक्ति गौर नहीं करता है तो वो ही मानसिक स्थिति से ग्रसित हो जाता है । यदि कोई व्यक्ति ऐसे या ऐसे प्रकार के लक्षणों को गंभीरता से समझता है तो वो ठीक हो सकता है।
ऐसे लोगों के लिए भारत सरकार द्वारा क्या सुविधाएँ दी है
?
ऐसे लोग बहुत जुडा संवेदनशील किस्म के प्राणी होते हैं । इन लोगो के लिए सरकार ने बहुत सुविधाएँ प्रदान की हैं जिनमे से कुछ इस प्रकार निम्नांकित हैं -
1
- अस्पतालों में भर्ती की सुविधा
मानसिक रोगी किसी भी प्रकार से दूसरे को नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए सरकार ने ऐसे लोगों के सभी राज्यों में अस्पतालों का निर्माण कराया है।
2
- पुलिस का कर्तव्य
यदि मानसिक रोगी बाहर घूम कर अपनी रक्षा नहीं कर पा रहा है, तो पुलिस थाना उसे अपनी सुरक्षा में लेगा। रोगी के परिवार वालों को इसकी सूचना थाने से देनी होगी।
3 - मानसिक रोगी के मानवाधिकार
मानसिक रोगी के साथ इलाज के दौरान कोई भी उदंड व्यवहार नहीं किया जाएगा। इलाज के समय इन पर कोई भी व्यर्थ प्रयोग नहीं किया जाएगा। जब तक कहा न जाए।
4
- रोगी की संपत्ति की देखभाल
यदि मानसिक रोगी जांच में अपनी संपत्ति की देखभाल की योग्य नहीं है, तो न्यायलय किसी को उसकी संपत्ति का प्रबंधक बनाता है और वो प्रबंधक उसकी संपत्ति की देखभाल करता है।
मेरा आप से विनम्र निवेदन है, यदि आपके आस - पास ऐसा कोई व्यक्ति है, तो आप इसकी सूचना दें। और इस प्रकार की व्यक्ति की सहायता करना हमारा भी कर्तव्य बनता है।





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