भारत का संविधान | संविधान की प्रस्तावना - Self-made 4 U

                                                       

 संविधान क्या है ?

 संविधान लिखित और मौलिक दस्तावेज होता है, जिसके आधार पर किसी भी देश की शासन व्यवस्था को चलाया जाता है ' संविधान शब्द की उत्पत्ति लैटिन भाषा के शब्द ' कॉन्सित्युरे ' से हुई है, जिसका अर्थ है प्रबंध करना, व्यवस्था करना या आयोजन करना। 

इतिहास 

द्वितीय विश्वयुद्ध की समाप्ति के पश्चात जुलाई 1945 में ब्रिटेन ने भारत संबंधी अपनी नीति की घोषणा की तथा भारत की संविधान सभा के निर्माण के लिए एक कैबिनेट मिशन भारत भेजा जिसमें 3 मंत्री थे। इस कैबिनेट मिशन की संस्तुियों के आधार पर ही संविधान सभा का गठन जुलाई1945 में किया गया। संविधान सभा के सदस्यों की कुल संख्या 389 निर्धारित की गई, जिसमें 292 ब्रिटिश प्रांतों से, 93 देशी रियासतों से एवं 4 कमिश्नर क्षेत्रों के प्रतिनिधि शामिल होने थे। मुस्लिम लीग हठ जाने के पश्चात संविधान सभा की सदस्य संख्या 299 हो गई। 



 संविधान सभा की पहली बैठक 9 दिसंबर, 1946 को हुई। इस बैठक के दौरान संविधान सभा का अस्थाई अध्यक्ष डॉ. सच्चिदनन्द सिन्हा को चुना गया। इसके बाद 11 दिसंबर, 1946 को डॉ. राजेन्द्र प्रसाद को संविधान सभा का स्थाई अध्यक्ष नियुक्त कर दिया गया। पंडित जवाहर लाल नेहरू ने संविधान सभा के समक्ष ' उद्देश्य प्रस्ताव ' 13 दिसंबर, 1946  प्रस्तुत किया , जो भारतीय संविधान की नींव थी। इस उद्देश्य प्रस्ताव को संविधान के रूप में परिष्कृत करने के लिए विभिन्न विषयों से संबंधित समितियों का गठन किया गया जो निमनवत हैं -:

                                                       
1- प्रारूप  ( अध्यक्ष - डॉ. भीम राव अंबेडकर )


2- कार्य संचालन ( अध्यक्ष - के. . मुंशी


3- संघ संविधान, संघ शक्ति ( अध्यक्ष - जवाहर लाल नेहरू

4- मूल अधिकार, अल्प संख्यक, प्रांतीय संविधान ( अध्यक्ष - सरदार बल्लभ भाई पटेल ) 


5- प्रक्रिया, वार्ता, तदर्थ झंडा समिति ( डॉ. राजेन्द्र प्रसाद )

6- अल्पसंख्यक उपसमिति ( अध्यक्ष - एच. सी. मुखर्जी )

7- सदन समिति ( अध्यक्ष - पी. पट्टाभि सीतारमैया


8- वित्त एवं स्टाफ ( अध्यक्ष - . एन. सिन्हा )

                             

इनमें सबसे प्रमुख डॉ. भीम राव अंबेडकर की अध्यक्षता में बनी सात सदस्यों वाली प्रारूप समिति थी। प्रारूप समिति में डॉ. भीम राव अम्बेडकर के अतिरिक्त एन. गोपालस्वामी अयंगर, अल्लादी कृष्णास्वामी अय्यर, के. एम. मुंशी, मोहम्मद सादुल्लाह, डी. पी. खेतान ( 1948 में इनकी मृत्यु के पश्चात टी. टी. कृष्णामाचारी नियुक्त ) और एन. माधवराव ( बी. एल. मित्र के स्थान पर नियुक्त ) अन्य सदस्य थे 
   
                                                           
संविधान का निर्माण

भारतीय संविधान विश्व का सबसे बड़ा लिखित संविधान है। इसके निर्माण में 2 वर्ष, 11 माह, 18 दिन का समय लगा। इस समयवधि के दौरान कुल 114 दिन बहस हुई। 
                 
26 नवंबर, 1949 को संविधान अंगीकृत किया गया, जिस पर कुल 284 सदस्यों ने हस्ताक्षर किए। संविधान सभा की अंतिम बैठक 24 जनवरी, 1950 को हुई और इसी दिन संविधान सभा द्वारा डॉ. राजेन्द्र प्रसाद को भारत का प्रथम राष्ट्रपति चुना गया। 
   
दो दिन के बाद 26 जनवरी, 1950 को भारतीय संविधान लागू कर दिया गया। संविधान को लागू करने के लिए इस दिन का चयन इसीलिए किया गया क्योंकि उसी दिन को कांग्रेस ने 1930 में आजादी दिवस के रूप में मनाया था। 
संविधान निर्माण के समय उसमें 395 अनुच्छेद, 22 भाग तथा 8 अनुसूचियां थी। 

                                                       
संविधान की प्रस्तावना 


 ' हम भारत के लोग भारत को एक सम्पूर्ण प्रभुत्व संपन्न, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतंत्रात्मक गणराज्य बनाने के लिए तथा उसके समस्त नागरिकों को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय, विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपसना की स्वतंत्रता, प्रतिष्ठा और अवसर की समता प्राप्त कराने के लिए तथा उन सब में व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता और अखंडता सुनिश्चित करने वाली बंधुता बढ़ाने के लिए दृढ़ संकल्प होकर अपनी इस संविधान सभा में आज दिनांक 26 नवंबर, 1949 को एतद द्वारा इस संविधान को अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मर्पित करते हैं।'

                                                                                 
                                                           
                                                 

भारतीय संविधान, विश्व के विभिन्न संवैधानिक प्रावधानों तथा भारतीय शासन अधिनियम 1935 का परिष्कृत रूप है।
भारतीय संविधान के निर्माण में निम्न देशों के संविधान से सहायता ली गई है -


ब्रिटेन -   

संसदीय शासन प्रणाली, कानून निर्माण प्रक्रिया, एकल नागरिकता, संसदीय विशेषाधिकार, मंत्रिपरिषद का लोकसभा के प्रति सामूहिक उत्तरदायित्व, राष्ट्रपति का संवैधानिक प्रमुख के रूप में अस्तित्व, अखिल भारतीय सेवा प्रणाली, द्विसदनीय व्यवस्था

संयुक्त राज्य अमेरिका -

प्रस्तावना, स्वतंत्र एवं निष्पक्ष न्यायिक व्यवस्था, मौलिक अधिकार, न्यायिक पुनर्विलोकन, सर्वोच्च न्यायालय का गठन एवम अधिकार, उपराष्ट्रपति पद। 

कनाडा -    शक्तियों का विभाजन, संघात्मक शासन व्यवस्था एवं अवशिष्ट शक्तियों का केंद्रीकरण, केंद्र द्वारा राज्यपाल की नियुक्ति।

ऑस्ट्रेलिया -  समवर्ती सूची, दोनों सदनों की संयुक्त बैठक, व्यापार वाणिज्य और समागम की स्वतंत्रता। 

जापान - विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया।

सोवियत संघ ( रूस ) - मौलिक कर्तव्य एवम नियोजन प्रणाली, प्रस्तावना में न्याय का आदर्श।

साउथ अफ्रीका - संविधान संशोधन प्रणाली, राज्यसभा के सदस्यों का निर्वाचन।

आयरलैंड - नीति निर्देशक तत्व, राष्ट्रपति की निर्वाचन पद्धति, राज्यसभा के सदस्यों का निर्वाचन।

जर्मनी - आपातकालीन उपबंध 

फ्रांस - गणतंत्र प्रणाली प्रस्तावना में स्वतंत्रता, समता, बंधूता के आदर्श।
  
                                                   

भारतीय संविधान की विशेषताएं 

लिखित एवं लोक - निर्मित संविधान।

विभिन्न संविधानों से उद्धृत।

नम्य एवं अनम्य का मिश्रण।

एकात्मक एवं संघात्मक़ शासन का मिश्रण। 

मौलिक अधिकारों की न्यायिक प्रकृति। 

स्वतंत्र निष्पक्ष न्याय प्रणाली। 

लोकतांत्रिक व्यवस्था 

विश्व का सर्वाधिक लंबा विस्तृत संविधान।

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