एड्स का पूरा नाम ऐक्वायर्ड इम्यूनो डिफेसिएन्सी सिंड्रोम हैं । इस बीमारी में का सम्बन्ध हमारे शरीर की प्रतिरोधक क्षमता ( इम्युनिटी पावर ) से है । इससे ग्रसित व्यक्ति का प्रतिरोधक तंत्र कमजोर हो जाने के कारण बिमारियों से लड़ने की ताकत पर सीधा असर पड़ता है और व्यक्ति की मृत्यु हो जाती हैं । इस बिमारी में कोई भी दवाई भी अपना असर नहीं दिखा पाती है ।
एड्स कब होता है
?
जब किसी भी व्यक्ति का शरीर एच. आई. वी. नामक वायरस के संक्रमण में आता है तो वो व्यक्ति एच. आई. वी. पॉजिटिव हो जाता है । इसके बाद व्यक्ति एड्स से ग्रसित हो जाता है । कुछ स्थितियों में ये देखा गया है की एच आई वी संक्रमित होने के वर्षों बाद भी व्यक्ति इससे ग्रसित नहीं होता।
व्यक्ति एच. आई. वी. संक्रमित कैसे हो सकता है ?
इसके संक्रमण के कुछ तरीकों से हो सकता हैं -
1 - संक्रमित माता से गर्भस्त शिशु को हो सकता है।
2 - यदि किसी संक्रमित व्यक्ति पर उपयोग की गयी सुई का उपयोग किसी स्वस्थ व्यक्ति पर होता है तो वो व्यक्ति भी संक्रमित हो सकता है ।
3 - यदि संक्रमित व्यक्ति का रक्त किसी स्वस्थ व्यक्ति को दे दिया जाए ।
4
- दो लोगों के मध्य असुरक्षित यौन सम्बन्ध जिसमे किसी भी प्रकार से शारीरिक श्रावों ( रक्त, वीर्य, योनि
श्राव, लार
) का संपर्क परस्पर हुआ
है।
एच.
आई.
वी.
संक्रमण से बचने के उपाय -
1
- कभी भी नशा
न करें । मुख्य्तः सुई द्वारा ।
2 - कभी भी रक्त लेने से पहले रक्त जांच कराएं तभी रक्त लें ।
3
- इंजेक्शन लगाने से पहले सुई को बदलने को कहे।
4
- यौन सम्बन्ध में एक से अधिक साथी नहीं बनाना चाहिए ।
5 - कंडोम का उपयोग करें।
6
- संक्रमण की पुस्टि होने के बाद पर्याप्त जांच एवं डॉक्टरी सलाह के आधार पर ही गर्भधारण करें ।
विश्व एड्स दिवस हर वर्ष 1 दिसंबर को मनाया जाता है। इस दिन लोगों को एड्स के प्रति जागरूक किया जाता है ।
एड्स एक प्रकार का रक्त संक्रमण हैं । आधुनिक चिकित्सा शैली एवं विशिस्ट दवाओं के तह सुरक्षित जीवनचर्या के बल बुते हम इस बिमारी लड़ सकते हैं । आप संक्रमण के दौरान वो सभी काम कर सकते हैं जो आप पहले करते थे। लेकिन आपको इसके लिए डॉक्टरी सलाह से नियमित जाँच करानी होगी और दवाइयां लेनी होंगी ।
हमेशा उन बातों का ध्यान दें जिनसे संक्रमण फैलता हैं । आपका जीवन अनमोल है, आप
अपने परिवार के लिए सब कुछ हैं । आप थोड़ी सी सावधानियों से अपने और अपने परिवार बचा सकते हो और जीवन को उसी खुसी और गरिमा से जी सकते हो। आपका परिवार आपसे प्रेम करता है । ये संक्रमण आपके आपके परिवार और जीवन से अधिक बलवान नहीं हो सकता ।
संक्रमित व्यक्ति के अधिकार क्या हैं -
रोगी के कानूनी अधिकार -
1 - स्वतंत्रता का अधिकार - एड्स से पीड़ित व्यक्ति अपने इक्षानुसार व्यवसाय चुन सकता है, निवास चुन सकता है। व्यक्ति को यात्रा की पूरी आज़ादी है।
2
- समानता का अधिकार - संविधान के अनुशार किस प्रकार किसी भी व्यक्ति को जाति, लिंग, समाज के आधार पर भेद - भाव नहीं किया जाता उसी प्रकार एड्स से पीड़ित व्यक्ति पर सार्वजनिक स्थानों पर कोई भी भेद - भाव नहीं किया जाएगा । यदि ये होता भी है, तो पीड़ित व्यक्ति न्यायलय से राहत प्राप्त कर सकता है ।
3
- शिक्षा का अधिकार - यदि स्कूल या कॉलेज में कोई छात्र इससे संक्रमित है, तो उस को शिक्षा से वंचित नहीं किया जाएगा । उसके अधिकार वैसे की रहेंगे जैसे आम आदमी के होते हैं ।
4
- शोषण के विरुद्ध अधिकार - यदि संक्रमित व्यक्ति के ऊपर कोई भी उत्पीड़न समाज द्वारा किया जा रहा है तो पीड़ित को न्यायिक उपचार का अधिकार है।
रोगी के
अन्य अधिकार -
1 - विवाह सम्बन्धी - यदि आपके बीमारी के बारे में आपके साथी को पता नहीं है तो उसे अवगत कराएं। नहीं तो तलाक हो सकता है। यदि आप अपने साथी के साथ बीमारियों की जांच नियमित रूप से करा रहे हैं, तो ये सराहनीय है। इसके अतिरिक्त एड्स से पीड़ित व्यक्ति अविवाहित है और वह विवाह का इक्षुक है, तो वह विवाह कर सकता है।
2
- संपत्ति सम्बन्धी - व्यक्ति के एच. आई. वी. संक्रमित होना पति - पत्नी के संपत्ति के अधिकार को प्रभावित नहीं करता है ।
3
- स्वास्थ्य सम्बन्धी - सभी केंद्रों में एच. आई. वी. के उपचार की दवाइयां निशुल्क उपलब्ध हैं। एड्स की जांच गोपनीय एवं निशुल्क होती है ।
यदि आप एड्स से संक्रमित हैं, तो आप अपने निकटतम वी. सी. टी. सी. से संपर्क कर सकते हैं । हमारा काम है आपको जागरूक करना ।





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