भारतीय संविधान का संशोधन : प्रक्रिया एवं सीमाएं - Self-made 4 U



 संविधान में संशोधन वह प्रक्रिया है, जिसके अन्तर्गत संविधान के किसी विधेयक अथवा कानून में परिवर्तन या सुधार किया जाता है। देश में लोकतंत्र की मूल अवधारणा को ध्यान में रखते हुए अब तक कुल 104 संशोधन किए जा चुके हैं। 

 क्या है संविधान में संशोधन की प्रक्रिया

सर्वप्रथम संशोधन संबंधी विधेयक का प्रस्ताव संसद के दोनों सदनों ( राज्यसभा एवं लोकसभा ) में से किसी भी सदन में प्रस्तुत किया जाता है, इसके लिए राष्ट्रपति की अनुमति लेना आवश्यक नहीं माना जाता। 

विधेयक किसी मंत्री या गैर सरकारी सदस्य द्वारा प्रस्तावित या प्रस्तुत किया जा सकता है, संविधान संशोधन विधेयक के मामले में संयुक्त बैठक ( संयुक्त संसदीय बैठक ) का कोई प्रावधान नहीं है।

विधेयक को पृथकपृथक दोनों सदनों में विशेष बहुमत द्वारा पारित करना अनिवार्य है। 

संघात्मक़ ढांचे में संशोधन से संबंधित विधेयक को कम से कम आधे राज्यों के विधानमंडलों का समर्थन/बहुमत हासिल होना आवश्यक है।

राष्ट्रपति संवैधानिक रूप से संविधान संशोधन विधेयक को अनुमति या सहमति देने को बाध्य है, वह पुनर्विचार हेतु विधेयक को नहीं भेज सकते, '24 वें संविधान संशोधन अधिनियम (1971)' के माध्यम से अनुच्छेद 368[2] में संशोधन करके ' अनुमति देगा ' शब्द रख दिए गए हैं, जिनके माध्यम से ऐसे विधेयक को वीटो करने की शक्ति राष्ट्रपति से छीन ली गई है।

संविधान संशोधन की प्रक्रिया के प्रकार

1- साधारण बहुमत के आधार पर संशोधन
           
ऐसे उपबंध जिनका कोई विशेष संवैधानिक महत्व नहीं होता, में संशोधन अनुच्छेद 368 से इत्तर संसद के दोनों सदनों में साधारण बहुमत से किया जाता है। संविधान के ऐसे उपबंधों को संशोधन के लिए संसद का साधारण बहुमत अर्थात लोकसभा या राज्यसभा के दोनों सदनों में उपस्थित अथवा मत देने वाले आधे या उस से अधिक सदस्यों की सहमति आवश्यक होती है


ऐसे उपबंध जो साधारण बहुमत से संशोधित किए जा सकते हैं निम्नलिखित हैं

()- अनुच्छेद - 2 ( भाग 1 ) नए राज्यों का प्रवेश अथवा स्थापना।

()- अनुच्छेद - 3 ( भाग 1 ) – नए राज्यों का निर्माण और वर्तमान राज्यों के क्षेत्रों, सीमाओं और नामों में परिवर्तन। 

()- अनुच्छेद - 4 ( भाग 1 ) – पहली अनुसूची ( राज्यों और केन्द्रशासित प्रदेशों का
उल्लेख ) तथा चौथी अनुसूची ( राज्यों तथा केंद्रशासित प्रदेशों के लिए राज्यसभा में सीटों के आवंटन का उल्लेख ) में संशोधन तथा अनुपूरक आनुषंगिक और परिणामिक विषयों का उपबंध करने के लिए अनुच्छेद - 2 तथा अनुच्छेद - 3 के अन्तर्गत बनाई गई विधियां। 

()- दूसरी अनुसूची राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, लोकसभाध्यक्ष, नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) आदि के वेतन तथा मंत्रियों का विवरण।

()- पांचवीं अनुसूचीअनुसूचित क्षेत्रों तथा अनुसूचित जनजातियों के प्रशासन एवं नियंत्रण  से संबंधित प्रावधान। 

()- छठी अनुसूची असम, मेघालय, त्रिपुरा तथा मिजोरम जैसे पूर्वोत्तर के राज्यों के जनजातीय क्षेत्रों के प्रशासन के बारे में उपबंध।

2- विशेष बहुमत के आधार पर होने वाले संशोधन
                       
भारतीय संविधान के भाग 20 के अन्तर्गत अनुच्छेद - 368 ( संविधान संशोधन की संसद की शक्तियों तथा उसके लिए प्रक्रिया ) के अन्तर्गत की संविधान संशोधन प्रक्रिया उल्लेख किया गया है, जिन उपबंधों का संबंध भारत के संघीय ढांचे से है, उन्हें छोड़कर अनुच्छेद - 368 के अन्तर्गत ' संशोधन ' माने जाने वाले शेष सारे उपबंध इसी वर्ग में शामिल हैं।

 इस प्रक्रिया के द्वारा निम्नलिखित संशोधन किए जा सकते हैं

()- मूल अधिकार 

()- राज्य के नीति निर्देशक तत्व 

()- वे सभी उपबंध जो अन्य दूसरी श्रेणियों के अन्तर्गत संशोधन में नहीं आते।

3-  संसद के विशेष बहुमत तथा कम से कम आधे राज्यों की विधानसभाओं/ विधानमंडलों    के समर्थन के आधार पर संशोधन – 
                   
संघीय ढांचे के अन्तर्गत शामिल उप बंधों को इस प्रक्रिया के तहत संशोधित किया जाता है। इस प्रकार के विधेयक दो चरणों में पारित किए जाते हैं। 

प्रथम चरण के अन्तर्गत संशोधन विधेयक को विशेष बहुमत द्वारा संसद के दोनों सदनों में पारित किया जाता है। 

दूसरे चरण में इसे पारित होने के पश्चात देश की कम से कम आधे राज्यों की विधासभाओं द्वारा इस आशय का ' संकल्प ' पारित कर अनुसमर्थन प्राप्त करना आवश्यक माना जाता है।

इस प्रक्रिया के अन्तर्गत निम्नलिखित प्रकार से संशोधन किए जाते हैं

()- राष्ट्रपति का चुनाव तथा राष्ट्रपति के चुनाव की प्रक्रिया [ भाग 5 ( संघ के अन्तर्गत अनुच्छेद - 54 तथा अनुच्छेद - 55 )] 

()- इस प्रक्रिया के अन्तर्गत संविधान के भाग 11 ( संघ तथा राज्यों के बीच संबंध ) के अध्याय 1 [ विधाई संबंध ( विधाई शक्तियों का वितरण )] में अनुच्छेद 245 से लेकर अनुच्छेद 255 तक निम्नलिखित विषय शामिल हैं

अनुच्छेद - 245 – संसद द्वारा और राज्यों के विधान मंडलों द्वारा बनाई गई विधियों का विस्तार। 

अनुच्छेद - 246 – संसद द्वारा और राज्यों के विधान मंडलों द्वारा बनाई गई विधियों की विषयवस्तु।

अनुच्छेद - 247 – कुछ अतिरिक्त न्यायालयों की स्थापना का उपबंध करने की संसद की शक्ति।

अनुच्छेद - 248 – अवशिष्ट विधाई शक्तियां। 

अनुच्छेद - 249 – राज्य सूची के विषय के संबंध में राष्ट्रीय हित में विधि ( कानून ) बनाने की संसद की शक्ति।

अनुच्छेद - 250 – यदि आपातकाल की उद् घोषणा प्रवर्तन में हो तो राज्य सूची के विषय के संबंध में विधि बनाने की संसद की शक्ति।

अनुच्छेद - 251 – संसद द्वारा ' अनुच्छेद - 249 ' तथा ' अनुच्छेद - 250 ' के अधीन बनाई गई विधियों और राज्यों के विधानमंडलों द्वारा बनाई गई विधियों में असंगति।

अनुच्छेद - 252 – दो या दो से अधिक राज्यों के लिए उनकी सहमति से विधि बनाने की शक्ति और ऐसी विधि का किसी अन्य राज्य द्वारा अंगीकार किया जाना।

अनुच्छेद - 253 – अन्तर्राष्ट्रीय करारों को प्रभावी करने के लिए विधान।

अनुच्छेद - 254 – संसद द्वारा बनाई गई विधियों और राज्यों के विधान मंडलों द्वारा बनाई गई विधियों में असंगति।

अनुच्छेद - 255 – सिफारिश और पूर्व मंजूरी के बारे में अपेक्षाओं को केवल प्रक्रिया के विषय मानना।

()- 7 वीं अनुसूची से संबद्ध विषय, 7 वीं अनुसूची में केंद्र तथा राज्यों के मध्य विधाई शक्तियों के वितरण से संबंधित ' संघ सूची ' (97), ' राज्य सूची ' (66) एवं   ' समवर्ती सूची ' (47) का उल्लेख किया गया है।

()- उच्चतम न्यायालय तथा उच्च न्यायालय।

()- संसद में राज्यों का प्रतिनिधित्व।

()- संविधान संशोधन करने की शक्ति।



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