Essay | भ्र्ष्टाचार क्या है ? - self-made 4 U


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राष्ट्र चलाने का दायित्व लोक सेवकों पर है इन्ही लोगों पर पुरे देश की अर्थव्यवस्था होती है यदि ये ही लोग भ्र्ष्ट ( करप्ट ) हो जाए तो ये लोग राष्ट्र की जड़ को कमजोर बना देते हैं जिससे राष्ट्र की विकास की गति में बाधा जाती है यदि लोक सेवक अपने दायित्वों  को भूल जाए और लोक कर्तव्य के निर्वहन के स्थान पर भ्र्ष्टाचार का रास्ता अपना ले, तो वो निंदनीय हैं। भारत में मुख्यतः भ्रस्टाचार की जड़ों ने फैलना बहुत पहले शुरू कर दिया था अतः ऐसे लोक सेवकों को भ्रष्टाचार से रोकने के लिए भ्रष्टाचार अधिनियम 1988 बनाया गया।


लोक सेवक कौन हैं ?
                   
मेरे अनुसार समाज में रहने वाला हर व्यक्ति लोक सेवक के अंतर्गत आता है सामान्यतः सरकारी नौकरी वालों को  ही लोक सेवक कहा जाता है चूँकि लोक कर्त्तव्य का पालन करना प्रत्येक नागरिक का प्रथम धर्म है, इसलिए प्रत्येक नागरिक लोकसेवक की श्रेणी में आता है सरकारी सेवक का कर्तव्य केवल वेतन लेना या पुरुष्कार पाना ही नहीं है बल्कि समाज में फैले भ्र्ष्टता को ख़त्म करना और लोक कल्याण सोचना है यदि मैं केवल सरकारी सेवकों को ही लोक सेवक कहूं, तो ये ठीक नहीं है मेरी नज़रों में समाज  से हर व्यक्ति को कुछ आवस्यकता होती है तो उसका भी उतना ही कर्त्तव्य होता है जितना सरकारी नौकरी वाले का।


भ्र्ष्टाचार क्या है ?
                      

अगर मैं इसका विच्छेद करूँ तो भ्रष्टाचार शब्द दो शब्द से मिलकर बना है - भ्र्ष्ट + आचार अर्थात भ्र्ष्ट का अर्थ है गन्दा और आचार का अर्थ है आचरण सामान्यतः भ्रष्टाचार को सामान्य अर्थ में रिश्वत कहा जाता है। लेकिन अधिनियम की धारा - 7 के अनुसार भ्र्ष्टाचारी वो है, जो लोक सेवक होते हुए भी किसी असक्षम व्यक्ति से इनाम या धन लेकर उसके काम के लिए अपने पद का दुरुप्रयोग करता है वो भ्रष्टाचार का दोषी है। धारा - 7 के अंतर्गत ऐसे व्यक्ति को 6 माह की करवास 5 वर्ष तक हो सकती है

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सरकार द्वारा उठाये गए कदम -

सरकार द्वारा कुछ महत्वपूर्ण कदम उठाये गए हैं, जो निम्न है -


1 सी. बी. आई. की कार्यवाही -
                                     यदि समाज में कोई लोक सेवक ऐसा है, जो भ्र्ष्ट है, तो भ्र्ष्टाचार की कोई शिकायत होने पर पुलिस अधीक्षक को गुप्त रूप  से सूचित किया जाएगा और पुलिस अधीक्षक इसकी योजना बनाकर उस भ्र्ष्ट लोक सेवक को पकड़ने का प्रयास करते हैं। यदि लोक सेवक केंद्र सरकार का यहाँ कार्यरत है, तो इसकी जांच सी. बी. आई. करती है  

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2 - ईमानदार लोक सेवक की रक्षा -
                                               

ये अधिनियम भ्र्ष्ट लोगो को पकड़ने के साथ - साथ ईमानदार लोक सेवक की रक्षा भी करता है क्योकि तभी उस सेवक का मुक़दमा  न्यायलय में चल सकता है जिस लोक सेवक के विभाध्यक्ष द्वारा इसी अधिनियम की धारा - 19 के अंतर्गत मुक़दमा चलाया हो यदि कोई भी व्यक्ति ईमानदार लोक सेवक के को परेशान करने के लिए झूठी रिपोर्ट भी बना सकता है लेकिन ईमानदार लोक सेवक का कोई अपराध नहीं है न्यायलय में लोकसेवक के विरुद्ध कोई चालान नहीं लिया जा सकता, क्योंकि ईमानदार लोकसेवक के विभाध्यक्ष द्वारा धारा - 19 के अंतर्गत कोई भी मुकदमा दर्ज़ नहीं है


3 - ईमानदार लोक सेवक के नाम से रिश्वत  लेना -
                                                         

यदि कोई प्रभावशाली व्यक्ति अपने पद  का दुरुप्रयोग करके ईमानदार लोकसेवक के पता होने पर उसके नाम से रिश्वत लेता है और लोकसेवक से काम करवा लेता है। ऐसे व्यक्ति को कम - से - कम 6 माह से लेकर 5 वर्ष के कठोर दंड का प्रावधान है

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भारत में बनी फिल्म गब्बर में  भ्र्ष्टाचार के विरोध  में एक व्यक्ति के आगे आने पर पूरा समाज इसके लिए आगे आया इसका थोड़ा - बहुत असर होने के बाद भी भारत में अभी भी भ्र्ष्टाचार खत्म नहीं हुआ है नया भ्रष्टाचार अधिनियम अब व्यापक बन चूका है इसके अंतर्गत कोई भी व्यक्ति हो सरकारी नौकरी वाला या निजी नौकरी वाला सभी को दंड का प्रावधान है।


भ्रष्टाचार को दूर करने के उपाय -


1 - सरकार को भ्र्ष्टाचार के विरूद्ध और शख्ती बरतने की जरूरत।


2 - सभी लोक सेवा के कार्यों में लोक सेवक को शपथ करने की प्रथा हो कि मैं भ्र्ष्टाचार नहीं करूँगा और ही करने दूंगा।


3 - मानवता वादी सोच का उदय करने कि आवस्यकता।


4 - प्रत्येक नागरिक को इसके प्रति विभिन्न कार्यक्रमों के तहत जागरूक करना


5 - यदि आपसे कोई रिश्वत लेता या आपको देता है, तो तुरंत ही उसके ऊपर मुक़दमा चलाना।  

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