आजकल मेरी दिनचर्या में नई किताबें जुड़ गयी हैं, जिनके बारे में पढ़ना और भी रोचक लगता है। मेने कुछ दिन पहले एक किताब पढ़ी थी जो बालश्रम पर आधारित थी। मुझे आजतक ये लगता था, जो मैंने स्कूल में पढ़ा है शायद बालश्रम का विषय वही तक है। लेकिन ये उससे और ज्यादा आगे तब बढ़ जाता है जब तरह के क़ानून हमारे संविधान में मौजूद है। लेकिन लोग कुछ धन के लिए अपने बच्चों को काम के लिए भेज देते हैं, जबकि उन बच्चों की उस समय पढ़ने की उम्र होती है। ये ज्यादातर गरीब समाज या पिछड़े समाज में देखा जाता है। ये उनकी अशिक्षा के कारण भी होता है लेकिन ये लोग कानून और संविधान के बहुत बड़े दोषी हैं।
क्या है ये अपराध
?
मेरे अनुसार बालश्रम एक ऐसी प्रथा है जिसमे समाज, परिवार के लोग बच्चों पर नौकरी के लिए दबाव डालतें है। बालश्रम एक ऐसा अपराध है जो उन छोटे मासूमों पर होता है, जिनका बचपन उनसे छीन लिया जाता है। मुझे कक्षा नौ की एक कविता याद आ गयी जिसका नाम था, ‘ बच्चे काम पर जा रहे हैं
‘ । इस कविता ने मुझे बहुत प्रभावित किया, मैं सोचता मेरी उम्र के बच्चे जो मेरे साथ स्कूल आते वो आज काम पर जा रहे हैं। कहाँ गयी उन बच्चों की किताबें, खिलोनें, उनकी खुशियां। ये सब उनसे छीन लिए गए हैं। वो चंद पैसों के लिए अपना बचपन खराब कर रहे हैं। ये सब उस कविता के माध्यम से बताया गया है।
1979 में सरकार द्वारा ‘ गुरुकुल स्वामी समिति’ का गठन किया गया। इसका उद्देस्य बाल मजदूरी को हटाना था। लेकिन बाद में ये देखा गया की जब तक समाज में गरीबी रहेगी तब तक इस साकार नहीं किया जा सकता। लेकिन समिति ने ये सिफारिश की , कि आवश्यक क्षेत्रों में इसके लिए कदम उठाये जाएँ।
इसके पश्चात 1986 में ‘ बाल मजदूरी अधिनियम
’ लागू किया गया। इस अधिनियम के तहत सरकार ने बाल मजदूरी को हटाने और बच्चों को खतरनाक व्यवसाय से हटाने पर जोर दिया गया। इसके बाद सं 1987 में ‘ राष्ट्रीय बाल मजदूरी अधिनियम ‘ को लागू किया गया और इसके तहत खतरनाक कार्यों में लगे बच्चों को कार्यो से हटाने के लिए कार्य किया गया।
बाल श्रम में मुख्यतः बालकों को ध्यान में रखा जाता है। क्योकि इसमें बालक सबसे ज्यादा होते हैं। हमारे भारत कि जनसंख्यां का एक तिहाई भाग बालकों का है। आज के बालक ही कल का देश संभालेंगे और इसके लिए ये आवश्यक भी है कि हमें ऐसी प्रथाओं और अपराधों को ख़तम कर देना चाहिए जिनमे इन भावी बच्चों का का सुख निहित न हो। यदि हमें अपने समाज को समृद्धशील बनाना है तो हमें बालकों के ऊपर होने वाले इस अन्याय को हटाना होगा।
बालश्रम से बच्चों को बचने के उपाय
1-
पूर्व स्कूल शिक्षा
यदि बालकों को प्रारम्भ से ही स्कूली शिक्षा मिल जाये तो वे कभी इस कार्य कि और नहीं देखेंगे। यदि बालक स्कूल जाता है, तो वो इस अपराध से स्वयं को तथा दूसरों को जागरूक करके सरकार कि इस योजना में अपना सहयोग दे सकता है।
यदि बालक के परिवारजन उसके पोषण तथा स्वास्थ्य सम्बन्धी दिक्कतों कि और ध्यान देंगे तो बालक को भविस्य में कोई परेशानी नहीं होगी।
4-
राष्ट्रीय बाल कोष
सन 1979 में बारात सरकार द्वारा इस कोष कि स्थापना कि गयी। इसका उद्देश्य राष्ट्रीय, राज्य, और जिला स्तर के संगठनों को वित्तीय सहायता देना है ताकि वो उन बच्चों के कल्याण हेतु कार्यकम कर सकें जिन बच्चों के पास आश्रय नहीं है। इसमें अनुसूचित जाति, जनजाति एवं पिछड़े वर्ग के लोगो को प्रधानता दी गयी है। इसके अतिरिक्त इसमें किसी विशेष योजना के लिए एक लाख रूपए उपलब्ध कराये जाते हैं जिनका निम्न परियोजनाओं के लिए है -
--- जिन बच्चों के पास उनका आश्रय नहीं है।
--- जिन बच्चों ने स्कूली शिक्षा छोड़ दी है। (असंगठित क्षेत्रों में कार्यरत बच्चे
--- जो बच्चे शहरी क्षेत्रों में कामकाज में लगे हैं।
--- पिछड़े और कमजोर वर्ग के बच्चों के लिए कौसल और आयोत्पादक प्रशिक्षण कार्यकम।
4-
रेडियो के माध्यम से विकास का कार्यकम
1992 में बहुत से शहरों में आकाशवाणी की व्यवस्था की गयी ये केंद्र आंगनबाड़ी के बच्चों के लिए कार्यक्रम का प्रसारण करते हैं।
बालमजदूरी का समाधान मेरी नजरों में अभी पूर्णतया नहीं हुआ है। क्योकि भारत में अभी भी ऐसे बहुत से क्षेत्र ऐसे हैं जहाँ अभी शिक्षा का प्रसार नहीं हुआ है। सरकार इसके लिए कार्यरत रहती है की इस प्रकार की सभी कुरीतियों को देश से हटाने का प्रयत्न करे। इसमें केवल सरकार ही नहीं बल्कि हमें भी उनका सहयोग देना जरूरी है। यदि हम इस प्रकार की प्रथाओं को देश से हटा पाए तो ये हमारी बहुत बड़ी सफलता होगी।
यदि मैं आज भी उस कविता में ध्यान दूँ तो मुझे शायद उतना ही आश्चर्य होगा जितना पहले था। मुझे बिलकुल भी ये यकीन नहीं होता की मेरे समाज और मेरे देश की जनता इन कुरीतियों को बढ़ावा देती है। जब तक पूरा देश इसके लिए जागरूक नहीं होगा तब तक ये कहना कठिन है, की भारत इस रीती से मुक्त हो गया।
बाल मजदूरी समस्या निराकरण कैसे
करें
--- बच्चे जिन श्रमों में कार्यरत हैं उन पर प्रतिबन्ध लगाना चाहिए। और मेरे अनुसार ऐसे व्यवसायों को पूर्णतः बंद कर देना चाहिए जहाँ बालश्रम होता हो।
--- जो कानून संविधान में बच्चों के कल्याण के लिए हैं उन्हें सख्ती से लागू करना चाहिए ताकि बच्चे उन व्यवसायों से हट सके।
--- यदि बच्चे इन कार्यों में संलग्न भी हैं तो मेरे अनुसार उनके शिक्षा सम्बन्धी कानूनों का खंडन नहीं किया जाना चाहिए।
--- बच्चों के माता - पिता को जागरूक करने के लिए सरकार की और से कार्यकम किये जाने चाहिए।
--- यदि हमें भावी पीढ़ी में ये बच्चे चाहिए तो इनका सर्वांगीण विकास होना चाहिए। जिससे ये भविष्य के देश के कुशल नागरिक बने।
--- वैसे तो मेरे अनुसार बच्चों को खतरनाक कार्य से दूर रखना चाहिए यदि किसे विशेष स्थिति में वो इस कार्य को करते हैं, तो उनका बीमा किया जाना आवश्यक है।
--- व्यवसाय में ऐसा वातावरण मालिक द्वारा होना चाहिए। जिससे बच्चे स्वयं को सुरक्षित अनुभव करें।
सुझाव
यदि हम बाल मजदूरी को ख़तम करना चाहते हैं तो समाज की आम जनता को जागरूक करना परमावश्यक है। जैसा की मैंने ऊपर बताया है की माता-पिता की बच्चों में अहम भूमिका है। बच्चों का सारा विकास उन पर आधारित है, इसलिए कार्यक्रमों के तहत उन्हें उनका दायित्व समझाना आवश्यक है। स्वयं सेवी संस्थाओं,
विद्यालयों,
पंचायती राज़ संस्थाओं को समाज को जागरूक करने के किये निरंतर रूप से आगे आना चाहिए।
जो भी कानून बाल मजदूरी रोकने के लिए बने हैं उनका सख्ती से पालन होना चाहिए। जो भी खतरनाक व्यवसाय हैं उनसे बच्चों को दूर रखना चाहिए और यदि कोई ऐसा करता है तो उस पर कार्यवाही होनी चाहिए।
बाल मजदूरी एक ऐसा अपराध है जिसमे बच्चों के मानसिक विकास को छति पहुँचती है। और वे अपना शारीरिक विकास भी पूर्णतः नहीं कर पाते। इसलिए मेरा ये सुझाव है की उन बच्चों को उचित वातावरण तथा विकास के अवसर मिलने चाहिए। यदि हम सरकार के साथ मिलकर बाल मजदूरी को मिटाना चाहते हैं तो हमें आगे आना होगा। हमें बच्चों को उनके अधिकार बताने होंगे। और एक महान देश की नीव रखनी होगी।





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