आनुवंशिकता क्या है ?
जीवधारी अपने सामान संन्तान को उत्पन्न करतें हैं । सभी जीवधारियों में कुछ विशिष्ट लक्षण होते हैं , जो माता - पिता से संतानों में पहुंचते हैं । इन लक्षणों को आनुवांशिक लक्षण या वंशगत लक्षण कहते हैँ। संताने पूर्ण रूप से अपने जनकों के सामान नहीं होती है । इनमे कुछ - न - कुछ बिभिन्नताएँ पाई जाती है। ये विभिन्नताएं अनुवांशिक या वातावरण होती है । ये भिन्नताएं अनुवांशिक या वातावरणीय होती हैं । आनुवंशिक भिन्नताएं वंशागत नहीं होती है । आनुवंशिक शुद्ध का प्रयोग सर्वप्रथम डब्ल्यू बेट्सन ने किया था ।
जैव विकास क्या है ?
जैव विकास धीमी गति से होने वाला परिवर्तन है । जिसके परिणाम स्वरुप पूर्वकाल के सरल संरचना वाले निम्न कोटि के जीवधारी से जटिल संरचना वाले एवं उच्च कोटि के जीव धारियों का विकास हुआ है । जैव विकास कहलाता है । दूसरे शब्दों में जीवधारियों में होने वाले इस परिवर्तन जिसके फलस्वरूप साधारण संरचना वाले फ़ीवधारी से जटिल जीवधारी का विकास हुआ है ।
जैव विकास कहलाता है ।
आनुवंशिक लक्षणों का नियंत्रण तथा वंशागति की आनुवंशिक इकाईयां जीन कहलाती है । मेंडल ने इन्हे कारक कहा है । जॉनसन ने इन्हे जीन कहा था । यह डी. एन. ऐ. का भाग होता है। इनमे अनुवांशिक कोड निहित होता है ये जैविक क क्रियाओं का नियंत्रण एवं नियमन करती है ।
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